* पति एकता जिंदाबाद *

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

रविवार का दिन था
पीड़ित-प्रताड़ित-पति
जुलूस के साथ नारे लगा
रहे थे …………..
पति एकता जिंदाबाद
पति एकता जिंदाबाद
इतने में पत्नियों का हुजूम
आया …….मै जोर जोर से
नारे लगा रहा था
पति एकता जिंदाबाद
जिन्दा……………..
पीछे देखा तो सभी
पति नदारद …..मै अकेला
पत्नी को देखा तो
सती-पति की याद आयी
बोलने लगा ……….
सती एकता जिंदाबाद-2
पत्नी शेर की तरह गुर्राई
और घर को चली गयी ।।
👍मधुप बैरागी

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भूरचन्द जयपाल
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मैं भूरचन्द जयपाल सेवानिवृत - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिंदी रचनाएं 9928752150

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