पतझड़ है ज़िंदगी

दुष्यंत कुमार पटेल

रचनाकार- दुष्यंत कुमार पटेल "चित्रांश"

विधा- गज़ल/गीतिका

वो छोड़ा है शहर जबसे पतझड़ है ज़िंदगी
भीगी-भीगी सी आंखे है पतझड़ है ज़िंदगी

बसर करे कहाँ ढह गया है आशियाना
खो गई है खुशियाँ कहाँ पतझड़ है ज़िंदगी

न किया फ़िर इस दिल ने उसका इंतज़ार
गम से कर ली है दोस्ती पतझड़ है ज़िंदगी

रुसवा भी हुए चाहत में , फना भी हो गये
तन्हाई का आलम है पतझड़ है ज़िंदगी

जीवन अधूरा डूब गई सपनों की नईया
पीर की बयार आ ठहरा पतझड़ है ज़िंदगी

यादों की भंवर में फस गया दिल बेचारा
न सावन न मधुमास पतझड़ है ज़िंदगी

माना हमें बना दी उसकी यादों ने शायर
छूप-छूप के रो रहें है पतझड़ है ज़िंदगी

"दुष्यंत" तूने क्या पाया जालिम दुनिया से
पल-पल है चोट खाया पतझड़ है ज़िंदगी

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दुष्यंत कुमार पटेल
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नाम- दुष्यंत कुमार पटेल उपनाम- चित्रांश शिक्षा-बी.सी.ए. ,पी.जी.डी.सी.ए. एम.ए हिंदी साहित्य, आई.एम.एस.आई.डी-सी .एच.एन.ए Pursuing - बी.ए. , एम.सी.ए. लेखन - कविता,गीत,ग़ज़ल,हाइकु, मुक्तक आदि My personal blog visit This link hindisahityalok.blogspot.com

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