पडिंत रावण सा नही

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

पडिंत रावण सा नही, हुआ और विद्वान !
ले डूबा उसको मगर, उसका ही अभिमान!!

सच्चाई के सामने ,……. गई बुराई हार !
मिले दशहरा से यही, हमें सीख हर बार !!

मन में भीतर का अगर, दिया न रावण मार !
पुतले का करके दहन, नही निकलता सार !!

काम क्रोध मद लोभ सह, त्यागें दुर्गुण सर्व!
होय सफल रावण दहन, व्यर्थ अन्यथा पर्व।!

उस रावण का कीजिये, पहले काम तमाम !
वो जो भीतर बैठ कर,…करे कुकर्मी काम !!
रमेश शर्मा

Sponsored
Views 9
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
RAMESH SHARMA
Posts 178
Total Views 3.2k
अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia