न वो रात सवांरा करे

milan bhatnagar

रचनाकार- milan bhatnagar

विधा- गीत

न वो रात सवारा करे
कोई चाँद से कह तो दे, न वो रात सवारा करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये दिल, कैसे गवारा करे,
पलकों पे सुनहरे से सपने सज जाते हैं,
तन्हाइयों के बादल सारी रात रुलाते हैं,
कोई ख्वाबों में आकर के, मेरा चैन चुराया करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये दिल, कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

आहाट सुन मेरी, साँसे रुक जातीं हैं,
आँखों में तेरी ही, सूरत बस जाती है,
कोई दिल में आ करके, धड़कन को जगाया करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

जुल्फों में तेरा चेहरा, चाँद सा लगता है,
अधरों पे तेरे मेरा,बस नाम सा लगता है,
मुस्काना तेरा मुझ पर, बिजली सा गिराया करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

आगोश में यादों की धड़कन खो जाती है,
मीठी मीठी दिल में तेरी आस जगाती है,
ये मस्त पवन आकर तेरा गीत सुनाया करे
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
……….कोई चाँद से कह तो दे…..

कोई चाँद से कह तो दे, न वो रात सवारा करे,
वो दूर हों ऐसे में, तो ये, दिल कैसे गवारा करे,
"मिलन " १३/८/२०१५

Views 4
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
milan bhatnagar
Posts 17
Total Views 187
बाल्यकाल से ही कविता, गीत, ग़ज़ल, और छंद रहित आधुनिक कविताएँ लिखना मेरा शौक रहा है कुछ गीतों को स्वर भी दिया गया है ! "गज़ल गीतिका" मेरा सम्पूर्ण संग्रह है

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia