न जीना मुहाल कर मुझे तु जहर दे

बबीता अग्रवाल #कँवल

रचनाकार- बबीता अग्रवाल #कँवल

विधा- गज़ल/गीतिका

न जीना मुहाल कर मुझे तु जहर दे
कफ़स में रखे तो मेरे पर कतर दे

ठिकाना नहीं है मुझे कोई घर दे
नहीं घर अगर कोई तेरा ही दर दे

सहारा यतीमों का मुझको बना दो
दुआओं मे मेरी तो इतनी असर दे

सलामत रहे ये दिवाना हमारा
क़यामत का इनको न कोई कहर दे

के नफ़रत निभाना कँवल अब नहीं है
रक़िबों के सीने में भी प्यार भर दे

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बबीता अग्रवाल #कँवल
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जन्मस्थान - सिक्किम फिलहाल - सिलीगुड़ी ( पश्चिम बंगाल ) दैनिक पत्रिका, और सांझा काव्य पत्रिका में रचनायें छपती रहती हैं। (तालीम तो हासिल नहीं है पर जो भी लिखती हूँ, दिल से लिखती हूँ)

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