#नज़राना

Surya Karan

रचनाकार- Surya Karan

विधा- गज़ल/गीतिका

बेमतलब की ये ; सारी दुनियादारी है ।
तेरे एहसान मुझपे , जिन्दगी से भारी है ।

जिन्दगी की शामें तेरे आँचल में गुज़ारी है
नश्तर चुभोना उसमें ; क़यामत से भारी है ।

तू माँग ले ये ज़िस्म ,और ये जान तुम्हारी है
मंदिर में मेरे दिल के ; बस मूरत तुम्हारी है ।

मेरे ज़हनों-ज़िस्म में ; खुशबु तुम्हारी है ,
पास जो दिल के हो तो, ज़न्नत हमारी है ।

तेरे एहसान मुझपे , जिन्दगी से भारी है …….

Views 8
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Surya Karan
Posts 11
Total Views 60
Govt.Teacher, M.A. B.ed (eng.) Writer.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia