नोट बदल गये देश बदलेगा

विजय कुमार अग्रवाल

रचनाकार- विजय कुमार अग्रवाल

विधा- कविता

सुबहा से उठकर लाइन में लग गये शाम को मेरा नम्बर आया ।
खुशी के मारे उछल पड़ा मैं नया नोट जब हाथ में पाया ॥
कैसी कैसी कठिनाई थी किसी को यह बतला नहीँ पाया ।
लाइन छोड़ कहीँ जा नहीँ पाया पूरे दिन कुछ खा नहीँ पाया ॥
मेरा मिशन था नोट बदलना लगा पहाड़ मैं चढ़ कर आया ।
वो निकला है देश बदलने अब जाकर मै समझ यह पाया ॥
कितना कठिन यह निर्णय होगा जिसका उसने बीड़ा उठाया ।
सारे दुश्मन मिल गये उसके टस से मस कोई कर नहीँ पाया ॥
बदल रहा है देश मेरा यह मेरी तो यह समझ में आया ।
तुम भी समझ जाओगे यदि जो तुमने उसका साथ निभाया ॥

विजय बिज़नोरी

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विजय कुमार अग्रवाल
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मै पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बिजनौर शहर का निवासी हूँ ।अौर आजकल भारतीय खेल प्राधिकरण के पश्चिमी केन्द्र गांधीनगर में कार्यरत हूँ ।पढ़ना मेरा शौक है और अब लिखना एक प्रयास है ।

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