नोट-बंदी

ईश्वर दयाल गोस्वामी

रचनाकार- ईश्वर दयाल गोस्वामी

विधा- गज़ल/गीतिका

हर तरह से हर गति अब आज मंदी हो गई ।
जब से मेरे देश में ये , नोट-बंदी हो गई ।

मिट्टी के भाव से बिकता है किसानों का अनाज ,
निर्धनों के घर में ज्यादा और तंगी हो गई ।

बैंक की लाइन में अब भी भीड़ केवल निर्धनों की,
घर बैठे ही बड़ों-बड़ों की नयी करेंसी हो गई ।

वेईमानी करने का मौका हमें पहले नहीं था ,
नोट-बंदी की कृपा से अपनी चाँदी हो गई ।

श्वेत ने काले को बिल्कुल दूधिया-सा कर दिया,
बैंक बालों की चुनरिया आज धानी हो गई ।

बैंक का यह सिलसिला बदस्तूर जारी है अब भी,
पतिव्रता कहते थे जिसको, आज रंडी हो गई ।

दम नहीं 'ईश्वर' यहाँ पर शेर की भी गर्जना में ,
अब व्यवस्था गीदड़ों की चाल- मंडी हो गई ।

ईश्वर दयाल गोस्वामी ।
कवि एवम् शिक्षक ।

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ईश्वर दयाल गोस्वामी
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-ईश्वर दयाल गोस्वामी कवि एवं शिक्षक , भागवत कथा वाचक जन्म-तिथि - 05 - 02 - 1971 जन्म-स्थान - रहली स्थायी पता- ग्राम पोस्ट-छिरारी,तहसील-. रहली जिला-सागर (मध्य-प्रदेश) पिन-कोड- 470-227 मोवा.नंबर-08463884927 हिन्दीबुंदेली मे गत 25वर्ष से काव्य रचना । कविताएँ समाचार पत्रों व पत्रिकाओं में प्रकाशित । रुचियाँ-काव्य रचना,अभिनय,चित्रकला । पुरस्कार - समकालीन कविता के लिए राज्य शिक्षा केन्द्र भोपाल द्वारा 2013 में राज्य स्तरीय पुरस्कार । नेशनल बुक ट्रस्ट नई दिल्ली द्वारा रमेशदत्त दुबे युवा कवि सम्मान 2015 ।

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