नोटबंदी – वरदान या अभिशाप

प्रदीप तिवारी 'धवल'

रचनाकार- प्रदीप तिवारी 'धवल'

विधा- गज़ल/गीतिका

आम जन हूँ नोटबंदी ने सताया मोदी जी
तारीख दस है पर पगार न पाया मोदी जी,

मन की बातों को बिछाता,ओढ़ता,खाता रहा हूँ,
पेट में है गैस वादों की सवाया मोदी जी,

फट चुकी तकदीर पैरों में बिवाईयों की तरह
पंक्तियों को द्रौपदी की चीर पाया मोदी जी,

नित कमाना, खर्च करना, लेना-देना रोकड़ा में
कैशलेस का क्यों बड़ा सा भ्रम फैलाया मोदी जी

आप की निज ईमानदारी पे है शंशय ह्रदय में
किसकी खातिर ये कहर हमपे है ढाया मोदी जी,

कैशलेस फिर – फिर करेगा पोषित पूंजीवाद को ही
होगी बटुए से निकासी कमीशन में जाया मोदी जी,

गन्दा कपड़ा मांगता है, जो देश सफाई के लिए
ऐसे कार्यपालकों पर क्यों, भरोसा जताया मोदी जी,

गढ़ी छवि, है पिघलती तासीर से दिनमान की
पाप तो चिल्लाएगा गर है छिपाया मोदी जी

स्वास्थ्य,शिक्षा,सड़क,पानी की अदद एक चाह है
आपने तो व्यक्ति पूजा को है बढाया मोदी जी,

ना ‘धवल’ लाइन में आया न आप जैसे नेतागण
बेबस दुल्हन का बाप क्यों है मौत पाया मोदी जी

अनूठे इस प्रयोग में क्या क्या गँवाया मोदी जी
देश पर हो ईश का अब वरद साया मोदी जी
प्रदीप तिवारी ‘धवल’
9415381880,raghvendu1288@gmail.com

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प्रदीप तिवारी 'धवल'
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मैं, प्रदीप तिवारी, कविता, ग़ज़ल, कहानी, गीत लिखता हूँ. मेरी दो पुस्तकें "चल हंसा वाही देस " अनामिका प्रकाशन, इलाहाबाद और "अगनित मोती" शिवांक प्रकाशन, दरियागंज, नई दिल्ली से प्रकाशित हो चुकी हैं. अगनित मोती को आप (amazon.in) पर भी देख और खरीद सकते हैं. हिंदी और अवधी में रचनाएँ करता हूँ. उप संपादक -अवध ज्योति. वर्तमान में एयर कस्टम्स ऑफिसर के पद पर लखनऊ एअरपोर्ट पर तैनात हूँ. संपर्क -9415381880

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