नेह की पीड़ा

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- कविता

जब गमन तुम्हारा होना तय था
क्यों गोपी में नेह जगाया था ,
मुझको लगता है कान्हा तुमने
नेह की पीड़ा का ,
मर्म कभी न पाया था ।
इस पीड़ा का निर्मोही कान्हा
अहसास यदि तुम कर जाते ,
नहीं विरह – अग्नि में हमको
गोकुल छोड़ गमन कर पाते ।
तुम क्या जानो नेह की पीड़ा
दुख कितना हमको देती है ,
निशदिन नितक्षण छवि तुम्हारी
ह्रदय में समायी रहती है ।

डॉ रीता
आयानगर,नई दिल्ली ।

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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