नेता जी बस इस चुनाव में मुझे भी टिकट दे दो

डॉ सुलक्षणा अहलावत

रचनाकार- डॉ सुलक्षणा अहलावत

विधा- कविता

नेता जी बस इस चुनाव में मुझे भी टिकट दे दो,
नेता बनने के सारे गुण हैं, चाहे इम्तिहान ले लो।

नेता जी झूठ बोलने में बड़ी महारत हासिल है,
हर कोई कहता है मुझे, नेता बनने के काबिल है।

जोड़ तोड़ करने में भी मेरा कोई मुकाबला नहीं है,
जोड़ तोड़ के बिना राजनीती में होता भला नहीं है।

नेता जी दादागिरी भी कर लेता हूँ मौका देखकर,
चापलूसी पर आ जाता हूँ हवा का झौंका देखकर।

मौनव्रत धारण करके सारे पापों को भी धो लेता हूँ,
फ़ायदा उठाने को मगरमच्छी आँसू भी रो लेता हूँ।

लोगों को चुना लगाने की बताऊं ही क्या आपको,
ठग चूका हूँ मैं दो तीन बार अपने ही सगे बाप को।

दो चार बार दसवीं बारहवीं में फ़ैल भी हो चुका हूँ,
सच कहूँ नेता जी वो प्रमाण पत्र भी मैं खो चुका हूँ।

बस नेता जी टिकट देकर मेरी यह आस पूरी कर दो,
चढ़ावा स्वीकार करके झोली मेरी टिकट से भर दो।

सुलक्षणा भी देखेगी तमाशा जनता के साथ साथ,
जेबें अपनी भरेंगे हम, ये जनता रहेगी खाली हाथ।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

Sponsored
Views 286
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
डॉ सुलक्षणा अहलावत
Posts 115
Total Views 29.2k
लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ सरस्वती की दयादृष्टि से लेखन में गहन रूचि है।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia