नूतन नववर्ष सनातन ये….

अरविन्द दाँगी

रचनाकार- अरविन्द दाँगी "विकल"

विधा- कविता

नूतन नववर्ष सनातन ये…..आदि अनादिकाल से चलित जो है।
भारतवर्ष जिससे सुशोभित है….राजा विक्रमादित्य से नामित जो है।
माँ शक्ति से जिसका आरंभ है…नवरात्र से शुभारंभ जो है।
ऎसे विक्रम संवत् नववर्ष का…स्वागत वंदन ह्रदय से है।।
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वैदिक विक्रम संवत् 2074 एवं नवरात्र पर्व की हार्दिक शुभकामनाये

✍कुछ पंक्तियाँ मेरी कलम से : अरविन्द दाँगी "विकल"

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अरविन्द दाँगी
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जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"

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