नियति माग॔ मे पग पग पर है ठोकर लाती, कर्मवीर का धैर्य मगर है कहाँ डिगाती ।

Anurag Dixit

रचनाकार- Anurag Dixit

विधा- कविता

नियति माग॔ मे पग पग पर है ठोकर लाती,
कर्मवीर का धैर्य मगर है
कहाँ डिगाती ।
जो राह बनाते सदा चीर प्रस्तर की कारा,
साहस से भय भूत सदा रहता है हारा,
लक्ष्य भेदने को जो प्रतिपल आगे बढते,
आगे बढ इतिहास प्रबलतम बे हैं गढते,
साहस, शील, सत्य संयम की जो हैं थाती,
नियति मार्ग मे पग पग पर है ठोकर लाती,
कर्मवीर का धैर्य मगर है कहाॅ डिगाती ।।
कर्मवीर की कर्मठता ही उसका धन है,
कर्मवीर को सदा नमन करता जन-जन है,
भाग्य स्वयं उसकी जीवटता से डरता है,
जो जीवन मे कर्मठता -वैभव भरता है,
क्रियाशीलता जव मूरत बन खुद ढल जाती,
नियति मार्ग मे पग-पग पर है ठोकर लाती,
कर्मवीर का धैर्य मगर है कहां डिगाती ।।

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Anurag Dixit
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मेरा जन्म फर्रुखाबाद के कमालगंज ब्लॉक के ग्राम कंझाना में एक साधारण ब्राह्मण परिवार में हुआ,मैंने वनस्पति विज्ञानं में एमएससी,ऍम.ए. समाजशाह्स्त्र एवं एडवरटाइजिंग पब्लिक रिलेशन में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा किया,व जन स्वास्थ्य में,परास्नातक डिप्लोमा किया, विभिन्न पत्रिकाओं में प्रकाशन एवं अभिव्यंजना साहित्यिक संस्था की आजीवन सदस्य्ता आपके सहयोग एवं सुझाव का आकांक्षी ! अनुराग दीक्षित

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