महक तुम्हारी हमें साँवरे ….

Rita Singh

रचनाकार- Rita Singh

विधा- गीत

नित सुबह आती है , नित शाम आती है
याद तुम्हारी हमें साँवरे दिन रात आती है ।

हर सहर भाती है , हर पहर भाती है
महक तुम्हारी हमें साँवरे हर लहर भाती है ।

हर भवन आती है , हर नगर आती है
छवि तुम्हारी हमें साँवरे हर डगर आती है ।

हर पल सताती है , हर क्षण सताती है
स्मित तुम्हारी हमें साँवरे हर पग सताती हैं ।

हर सुख जगाती है , हर दुख समाती है
डग तुम्हारी हमें साँवरे हर पथ दिखाती हैं ।

डॉ रीता

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Rita Singh
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नाम - डॉ रीता जन्मतिथि - 20 जुलाई शिक्षा- पी एच डी (राजनीति विज्ञान) आवासीय पता - एफ -11 , फेज़ - 6 , आया नगर , नई दिल्ली- 110047 आत्मकथ्य - इस भौतिकवादी युग में मानवीय मूल्यों को सनातन बनाए रखने की कल्पना ही कलम द्वारा कुछ शब्दों की रचना को प्रेरित करती है , वही शब्द रचना मेरी कविता है । .

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