निकल कर कहां से ये आई खबर—- गज़ल

निर्मला कपिला

रचनाकार- निर्मला कपिला

विधा- गज़ल/गीतिका

निकल कर कहां से ये आई खबर
मै ज़िन्दा हूँ किस ने उडाई खबर

हवा मे हैं सरगोशियां चार सू
न दे पर किसी को दिखाई खबर

किसी के यहां जश्न दिन रात हों
मुहल्ले को कब रास आई खबर

रकीबों के पाले मे रहबर गया
नही जा सकी फिर भुलाई खबर

पडी कान मे मुस्कुराती हुयी
मुहब्बत का पैगाम लाई खबर

कभी छू के होठों से बहकी फिरे
कभी हो जो तितली उडाई खबर

पतंगे के पंखों से चिपकी उडे
गुलों के लबों से चुराई खबर

बहुत दिन से बाहर न निकली थी वो
उदर मे पडी तिलमिलाई खबर
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निर्मला कपिला
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लेखन विधायें- कहानी, कविता, गज़ल, नज़्म हाईकु दोहा, लघुकथा आदि | प्रकाशन- कहानी संग्रह [वीरबहुटी], [प्रेम सेतु], काव्य संग्रह [सुबह से पहले ], शब्द माधुरी मे प्रकाशन, हाईकु संग्रह- चंदनमन मे प्रकाशित हाईकु, प्रेम सन्देश मे 5 कवितायें | प्रसारण रेडिओ विविध भरती जालन्धर से कहानी- अनन्त आकाश का प्रसारण | ब्लाग- www.veerbahuti.blogspot.in

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