*माँ बाप का निःस्वार्थ प्यार *

Neelam Ji

रचनाकार- Neelam Ji

विधा- कविता

हम चाहे जितने बड़े हो जाएं ,
बचपन कभी नहीं भूलते ।
भले ही भूल जाएं हर बात मगर ,
माँ की बाँहों का झूला कभी नही भूलते ।।

यूँ तो बचपन में सब कुछ खास होता है ,
हर एक अहसास दिल के पास होता है ।
मगर जो याद दिल से कभी नहीं मिटती ,
वो केवल माँ बाप का निःस्वार्थ प्यार होता है ।।

समय के साथ हमारी भावनाएं बदल जाती हैं ,
जीवन जीने की वजह बदल जाती हैं ।
माँ बाप का प्यार तो हमेशा वही रहता है ,
मगर हमारी प्राथमिकताएं बदल जाती हैं ।।

माँ बाप का प्यार कभी कम नहीं होता ,
बस प्यार का तरीका बदल जाता है ।
मत छोड़ना अकेला बुढ़ापे में माँ बाप को ,
वरना औलाद से विश्वास उठ जाता है ।।

जैसा करेंगे माँ बाप संग फल मिल ही जाएगा ,
ये समय का चक्र है कोई नहीं बच पाएगा ।
समय रहते सम्भल जाएं यही अच्छा होगा ,
वरना इतिहास हमारे साथ भी दोहराया जाएगा ।।

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Neelam Ji
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मकसद है मेरा कुछ कर गुजर जाना । मंजिल मिलेगी कब ये मैंने नहीं जाना ।। तब तक अपने ना सही ... । दुनिया के ही कुछ काम आना ।।

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