ना हम ञिशूल तलवारें ना ही पिस्तौल वाले हैं

Nasir Rao

रचनाकार- Nasir Rao

विधा- गज़ल/गीतिका

ना हम ञिशूल तलवारें ना ही पिस्तौल वाले हैं
अलग माहौल है अपना अलग माहौल वाले हैं
—–
फक़ीरी मैं फकीराना कोई अपना ना बेगाना
उलझयेगा नही हमसे कि हम कश्कोल वाले हैं
——
सभी हम जैसे सादा दिल नही रहते हैं बस्ती मैं
कईं चेहरे तो नकली हैं नक़ाबी खौल वाले हैं
—-

नासिर राव

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2 comments
  1. आहा मेरे भाई

    फक़ीरी मैं फकीराना कोई अपना ना बेगाना
    उलझयेगा नही हमसे कि हम कश्कोल वाले हैं
    बड़ा ही मुनफ़रिद शे’र ……….
    जिंदाबाद

    नज़ीर नज़र