ना ‘पाक’ पाकिस्तान

आशीष बहल

रचनाकार- आशीष बहल

विधा- कविता

पाक की नापाक हरकतें आखिर कब तक संहेंगे, देश दहक रहा है इंतकाम की आग में कब ये समझेंगे।
बहुत हुआ, सरहद पर अब इक दांव हमारा हो, संभल जा ऐ देश के दुश्मन ऐसा न हो कि लाहौर में लहराता तिरंगा प्यारा हो।

क्या मिलेगा तुझे कश्मीर कश्मीर करते जरा पलट कर देख इतिहास ऐसा न हो कि अबकी बार इस्लामावाद भी हमारा हो।
हे पाकिस्तान, सम्भल जा अभी वक्त हम देते हैं वरना याद रख हिसाब हम सूत समेत लेते हैं।
कर ले ऐ दुश्मन सितम्भ तू, तेरी इंतिहा हम देखेंगे, मर मिटेंगे जो जवान देश पर ऐसे शेर भारत में ही मिलेंगे।
वतन की आवरू को हम यूँ मिटटी में न मिलने देंगे,शहीदों के कतरे कतरे का हिसाब हम लेंगे।
इक दिन फैसला उनके और हमारे दरम्याँ होगा न कोई आतंकी न कोई पाकिस्तान होगा, तभी तो बुलन्दी पर अपना हिंदुस्तान होगा, इक और जमीन इक और आसमां होगा बीच में महकता अपना ये हिन्दुस्तां होगा।
आशीष बहल चुवाड़ी जिला चम्बा
Ph 9736296410

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आशीष बहल
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