नारी सृष्टि कारिणी

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌹🌹🌹🌹
नारी करती प्राण उन्मन,नारी सृष्टि कारिणी।
नियति का ये सत्य नियमन,नारी है नारायणी।।

हर रूप पूजनीय तेरा,तू अनेक रूपधारिणी।
युगों से तेरी प्रमुखता,तू आदिशक्तिरूपिणी।।

इस जहाँ से तू ना डर,तू है भयहारिणी।
घुट-घुट कर यूँ ना मर,तू है शत्रु नाशिनी।।

बढे़ जब भी अत्याचार,तू है दुर्गा,काली।
मौत भी गया हार,तू है सत्यवती सावित्री।

तुझ में शक्ति अपार,तू है शक्तिशालिणी।
कर दुष्टों का संहार,तू प्रचंडरूपधारीणी।।
🌹🌹🌹🌹-लक्ष्मी सिंह💓☺

Views 151
Sponsored
Author
लक्ष्मी सिंह
Posts 147
Total Views 45.1k
MA B Ed (sanskrit) please visit my blog lakshmisingh.blogspot.com( Darpan) This is my collection of poems and stories. Thank you for your support.
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia