नारी

निहारिका सिंह

रचनाकार- निहारिका सिंह

विधा- कविता

मैं विवश नही अब ,
मैं आदिशक्ति की ज्वाला हूँ ।
मैं हूँ अमृत ,
मैं ही विष का प्याला हूँ ।
मैं ही सृजनकर्ता ,
मैं संघराक हूँ ।
मैं देवों की जननी ,
संपूर्ण सृष्टि की पालक हूँ ।
पहचान मुझे मैं नारी हूँ ,
मैं पत्नी ,बहन , तेरी महतारी हूँ ।

निहारिका सिंह

Sponsored
Views 13
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
निहारिका सिंह
Posts 13
Total Views 150
स्नातक -लखनऊ विश्वविद्यालय(हिन्दी,समाजशास्त्र,अंग्रेजी )बी.के.टी., लखनऊ ,226202।

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia