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Ranjana Mathur

रचनाकार- Ranjana Mathur

विधा- कविता

नारी तू पृथ्वी की धुरी है

नारी तू जग की संचालिका है।
नारी तू संस्कृति की संवाहिका है।
नारी तू सभ्यता की समृद्धिका है।
नारी तू समाज की संयोजिका है।

नारी तू परिवार की संवृद्धिका है।
नारी तू मानव की सृजिका है।
नारी तू संतान की सेविका है।
नारी तू बालक की संरक्षिका है।

नारी तू पुरुष की सहचारिका है।
नारी तू नर की सहयोगिका है।
नारी तू पुरुष की निहारिका है।
नारी तू पुरुष जीवन की सुगंधिका है।

नारी तू परिवार की सुख समृद्धिका है।
नारी तू घर भर की परिचारिका है।
नारी तू परिवार की संवृद्धिका है।
नारी तू परिवार की मार्गदर्शिका है।

नारी तू विश्व की समन्वयिका है।
नारी तू संसार की पथ प्रदर्शिका है।
नारी तू ब्रह्माण्ड की संचालिका है।
नारी तू सृष्टि की निर्माणिका है।

तन मन धन से पूर्णतः समर्पित है नारी।
किन्तु वह न निरीह है न है कोई लाचारी।
यदि उसको किया गया दुखी और त्रस्त।
तो उसने प्रयुक्त कीं अपनी शक्तियां सारी।
और संसार से दुष्टों की सारी दुनिया संहारी।

—रंजना माथुर दिनांक 07/10/2017
मेरी स्व रचित व मौलिक रचना
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Ranjana Mathur
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भारत संचार निगम लिमिटेड से रिटायर्ड ओ एस। वर्तमान में अजमेर में निवास। प्रारंभ से ही सर्व प्रिय शौक - लेखन कार्य। पूर्व में "नई दुनिया" एवं "राजस्थान पत्रिका "समाचार-पत्रों व " सरिता" में रचनाएँ प्रकाशित। जयपुर के पाक्षिक पत्र "कायस्थ टुडे" एवं फेसबुक ग्रुप्स "विश्व हिंदी संस्थान कनाडा" एवं "प्रयास" में अनवरत लेखन कार्य। लघु कथा, कहानी, कविता, लेख, दोहे, गज़ल, वर्ण पिरामिड, हाइकू लेखन। "माँ शारदे की असीम अनुकम्पा से मेरे अंतर्मन में उठने वाले उदगारों की परिणति हैं मेरी ये कृतियाँ।" जय वीणा पाणि माता!!!

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