नारी तू नारायणी

पण्डित योगेश शर्मा

रचनाकार- पण्डित योगेश शर्मा

विधा- लेख

#शर्मा_जी_कहिन✍
अपनी आँखों,अपनी वाणी, और अपने दर्शन से विश्व को मोहित करदेने वाली खुद की परवाह किये बगैर स्वजीवन को ओरो पर समर्पित करदेनी वाली एक माता,एक बहन,एक पत्नी का योगदान जीवन अतुलनीय,और अनिवर्चनीय हे ईश्वर की सर्वोत्तम कृति के अनुरूप अपने दर्शन से आधुनिकता में बदलते हुए अंग-अंग के प्रदर्शन तक नारी का सफर जारी है,
आँखे देखने में अक्षम हो उस दुरी से खुद की एक झलक दर्पण में डाल खिलजी को मोहित करदेने वाली पद्मिनी हो या महृषि,तप्सियो का तप भंग करदेने वाली अप्सरा अपने सौदर्य के साथ ही अपने शिष्टाचार के लिए वन्दित हे,
अपने अस्तित्व के होने की गवाही भारतीय नारी पुरातन काल से ही देती आयी है,
विद्वता में विदुषी मैत्री,गार्गी हो,अपने पति की प्राण रक्षा हेतु यमराज से भीड़ जाने वाली सावित्री हो या युद्ध कौशल में कुशल झाँसी की रानी,भाष्य टिका लिखने में तल्लीन पति की सेवा में ततपर रहने वाली जेमिनी हो जो पति के साथ 40 वर्षो तक रह उनकी सेवा करके काम को जीत गई(जेमिनी टिका उनके नाम पर हे),अनन्त प्रतीक्षा की प्रतीक देवी उर्मिला हो या फिर अपने पति के साथ असहनीय दुखो,कष्टों को सहन करने वाली माँ सीता,हर क्षण हर पल अपनी सांसो को खुद लेकर उनका कर्ज वो अपने समर्पण से चुकाती हे ।
विश्व की हर नारी वन्दनीय हे ,उनका सम्मान करें सम्मान न दे सके तो कृपया अपमान तो न ही करे ,

यत्र नारी पूज्यते ,रमन्ते तत्र देवता
#नारायणी_नमोस्तुते ।।

पण्डित योगेश शर्मा !✍

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मिलते रहिये मिलते रहने से मिलते रहने का सिलसिला हु में ।।

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