### नारी, तुम शक्ति हो !

दिनेश एल०

रचनाकार- दिनेश एल० "जैहिंद"

विधा- कविता

### नारी, तुम शक्ति हो !

युग बीते, अंधकार छँटे, अज्ञानता हटी ।
शिक्षित हुए, ज्ञानी बने, साक्षरता बढ़ी ।।
लोग, कुटुंब, समाज की विवशता घटी ।
जग में बड़ा परिवर्तन की चंचलता उठी ।।

हर तरफ यूँ बदलाव की लहर कौंध गई ।
देश-विदेश की सारी प्रजा देख चौक गई ।।
नारी-सम्मान व समानता किंतु लौट गई ।
नर-प्रवृत्ति कोमल नारी-मन को रौंद गई ।।

पुरूष-समाज में पुरूषों का बोलबाला है ।
पुरूष वहशी, दरिंदा व मन का काला है ।।
बुद्धि, विवेक, विचारों पर पड़ा पाला है ।
मन में कुविचार, मस्तिष्क में घोटाला है ।।

गैर नारी को बहन कहता इक छलावा है ।
गैर माँ को माँ कहता उसका भुलावा है ।।
वह मौका परस्त व हवस का पुजारी है ।
वह बड़ा जुल्मी और बड़ा अत्याचारी है ।।

तुम शक्ति, जग-जननी, जगत-माता हो ।
तुम देवी, पूजनीय मानव-जन्मदाता हो ।।
तुम नेकी, संस्कार व संस्कृति प्रदाता हो ।
तुम शिष्टता व श्लीलता की निर्माता हो ।।

तुम्हें ही सौम्यता का बीज बोना होगा ।
अंदर व बाहर से भी तुम्हें लड़ना होगा ।।
तुम्हें ही इस समाज को बदलना होगा ।
अपना बचाव अब आपही करना होगा ।।

अब हो जाओ तैयार क्यूँ करती देरी हो ।
उठाओ कटार मन में नहीं हेरा-फेरी हो ।।
तेरा ही बोलबाला जग में चौतरफ़ा हो ।
तेरे पक्ष में अब हर निर्णय एकतरफा हो ।।

=======
दिनेश एल० “जैहिंद”
07. 06. 2017

Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
दिनेश एल०
Posts 76
Total Views 616
मैं (दिनेश एल० "जैहिंद") ग्राम- जैथर, डाक - मशरक, जिला- छपरा (बिहार) का निवासी हूँ | मेरी शिक्षा-दीक्षा पश्चिम बंगाल में हुई है | विद्यार्थी-जीवन से ही साहित्य में रूचि होने के कारण आगे चलकर साहित्य-लेखन काे अपने जीवन का अंग बना लिया और निरंतर कुछ न कुछ लिखते रहने की एक आदत-सी बन गई | फिर इस तरह से लेखन का एक लम्बा कारवाँ गुजर चुका है | लगभग १० वर्षों तक बतौर गीतकार फिल्मों मे भी संघर्ष कर चुका,,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia