नारी तुम अपनी पहचान करो ।

पूनम झा

रचनाकार- पूनम झा

विधा- गीत

नारी तुम अपनी पहचान करो ।
उठकर अपना सम्मान करो ।
अबला नहीं तुम तो सबला हो
शक्ति हो तुम ये तो ध्यान करो।
नारी तुम अपनी पहचान करो।
उठकर अपना सम्मान करो।
*
ममता की तो मूरत हो तुम ।
प्रेम भाव की सूरत हो तुम ।
सबके लिए तो तुम जीती हो
पर तुम भी हो कुछ ज्ञान करो।
नारी तुम अपनी पहचान करो।
उठकर अपना सम्मान करो।
*
सबकी खुशी में खुश हो लेती हो।
अपने आंसू को तो पी लेती हो ।
अबला हो ये क्यों दर्शाती हो तुम
जागो और अपना उत्थान करो।
नारी तुम अपनी पहचान करो ।
उठकर अपना सम्मान करो ।
@पूनम झा। कोटा,राजस्थान।
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पूनम झा
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मैं पूनम झा कोटा,राजस्थान (जन्मस्थान: मधुबनी,बिहार) से । सामने दिखती हुई सच्चाई के प्रति मेरे मन में जो भाव आते हैं उसे शब्दों में पिरोती हूँ और यही शब्दों की माला रचना के कई रूपों में उभर कर आती है। मैं ब्लॉग भी लिखती हूँ | इसका श्रेय मेरी प्यारी बेटी को जाता है । उसी ने मुझे ब्लॉग लिखने को उत्प्रेरित किया। कभी कभी पत्रिकाओं में मेरी रचना प्रकाशित होती रहती है | ब्लॉग- mannkibhasha.blogspot.com

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