नारी तुम अधिकार नहीं तुम तो जीवन का आकार हो…

अरविन्द दाँगी

रचनाकार- अरविन्द दाँगी "विकल"

विधा- कविता

नारी तुम अधिकार नहीं तुम तो जीवन का आकार हो…
नारी तुम अबला नहीं तुम तो सबल अपार हो…
नारी तुम विवश और नहीं तुम तो जननी संसार हो…
नारी तुम अब क्रंदन नहीं तुम तो प्रकृति को उपहार हो…
नारी तुम कमतर नहीं अब तुम तो शक्ति परम प्रतिकार हो…
नारी तुम केवल नवरात्रि की नहीं तुम तो पुज्यनीय हर वार हो…
नारी तुम बच्चों की मशीन नहीं तुम तो जीवन की सृजनहार हो…
नारी तुम अब बंदिशों में नहीं तुम मुक्त गगन आकाश हो…
नारी तुम ममता की सागर तुम रणचंडी जीवन संचार हो…

आभार नारीशक्ति🙏
✍कुछ पंक्तियाँ मेरी कलम से : अरविन्द दाँगी "विकल"

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अरविन्द दाँगी
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जो बात हो दिल की वो कलम से कहता हूँ.... गर हो कोई ख़ामोशी...वो कलम से कहता हूँ... ✍अरविन्द दाँगी "विकल"

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