“नारी की महिमा “(हाईकू 5-7-5)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- हाइकु

"नारी की महिमा "(हाईकू 5-7-5)
नारी बहुत
सहनशील होती
सम्मान योग्य

सम्मान योग्य
नित मान बड़ाती
खूब महान

खूब महान
काम काज करती
घर चलाती

घर चलाती
सबसे प्यार करे
खुशियां लाती

खुशियां लाती
मान सम्मान करे
दुखों को हरे

दुखों को हरे
सारा काम करे
थकती नही

थकती नही
कभी कभी दयालु
कभी क्रोधित

कभी क्रोधित
जब माँ बनती है
दुलार करे

दुलार करे
जब बेटी बनती
मान बड़ाये

मान बड़ाये
जब बहु बनती
सेवा करती

सेवा करती
जब पत्नी बनती
वंश बड़ाये

वंश बड़ाये
जब मुखिया बने
घर चलायें

घर चलायें
जब शिक्षिका बने
बच्चे पढ़ाये

बच्चे पढ़ाये
जब नेता बनती
देश चलायें

देश चलायें
सब कुछ करती
क्यूँ?बेटी मारे।

रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "

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ramprasad lilhare
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रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।

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