“नारी की महत्ता “(कुण्डलियाँ छंद)

ramprasad lilhare

रचनाकार- ramprasad lilhare

विधा- कुण्डलिया

"नारी की महत्ता "
(कुण्डलियाँ छंद "
1.नारी तुम ये न समझो, तुम हो अब कमजोर।
बन गयी हो अब तुम तो, भारत का सिरमौर।
भारत का सिरमौर, होत सब तेरे बूते।
हेय दृष्टि जो डालें, उन्हें पड़ेंगें जूते।
अबला हो तुम नारी, सभी तुझसे हैं भारी।
कहे रामप्रसाद, ये न तुम समझो नारी।।

2.नारी तु कमजोर नहीं, हैं तु देश की ढाल।
है कभी तु शांतचित तो, कभी तु हैं विकराल।
कभी तु हैं विकराल, तु मन को सबके भाये।
करे जो तुझे प्यार, बदले प्यार ही पाये।
जो करे गलत काम, तु पड़ती उन पर भारी।
कहे रामप्रसाद, कमजोर नहीं तु नारी।।
3.
माँ बनकर दुलार करै, बेटी मान बड़ाय।
पत्नी बन सेवा करै, बहनें बन हरसाय।
बहनें बन हरसाय,सभी को सुख पहुचावै।
नित प्रति प्रेम लुटाय, सभी के मन को भावै।
दुख सहन कर सारे, कभी ना करती आहा।
कहे रामप्रसाद, दुलार करे मेरी माँ।।
रामप्रसाद लिल्हारे
"मीना "

Views 28
Sponsored
Author
ramprasad lilhare
Posts 27
Total Views 341
रामप्रसाद लिल्हारे "मीना "चिखला तहसील किरनापुर जिला बालाघाट म.प्र। हास्य व्यंग्य कवि पसंदीदा छंद -दोहा, कुण्डलियाँ सभी प्रकार की कविता, शेर, हास्य व्यंग्य लिखना पसंद वर्तमान में शास उच्च माध्यमिक विद्यालय माटे किरनापुर में शिक्षक के पद पर कार्यरत। शिक्षा एम. ए हिन्दी साहित्य नेट उत्तीर्ण हिन्दी साहित्य। डी. एड। जन्म तिथि 21-04 -1985 मेरी दो कविता "आवाज़ "और "जनाबेआली " पत्रिकाओं में प्रकाशित हुई है।
इस पेज का लिंक-

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
Related Posts
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia