“नारी की महत्ता”दोहे

Dr.rajni Agrawal

रचनाकार- Dr.rajni Agrawal

विधा- दोहे

"*नारी की महत्ता पर दोहे* *************** नारी जग का मूल है, नारी से संसार। नारी जीवन दाायिनी,पूजो बारंबार।।
नारी घर की आन है, नारी घर की शान। नारी बिन घर -घर नहीं, नारी है वरदान।।
नारी से जन्मा पुरुष, नारी है पहचान। पत्नी बन संतान दी, नारी वृक्ष समान।।
नारी कोमल फूल सी, नारी है बलवान। वक्त पड़े दुर्गा बने, थामे तीर कमान।।
नारी के अंतस बसे, रूप शील गुण चार। त्याग क्षमा गहना बने, नारी जग आधार।।
डॉ. रजनी अग्रवाल" वाग्देवी रत्ना"

बेहतरीन साहित्यिक पुस्तकें सिर्फ आपके लिए- यहाँ क्लिक करें

Views 597
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
Dr.rajni Agrawal
Posts 37
Total Views 871
 अध्यापन कार्यरत, आकाशवाणी व दूरदर्शन की अप्रूव्ड स्क्रिप्ट राइटर , निर्देशिका, अभिनेत्री,कवयित्री, संपादिका समाज -सेविका। उपलब्धियाँ- राज्य स्तर पर ओम शिव पुरी द्वारा सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री पुरस्कार, काव्य- मंच पर "ज्ञान भास्कार" सम्मान, "काव्य -रत्न" सम्मान", "काव्य मार्तंड" सम्मान, "पंच रत्न" सम्मान, "कोहिनूर "सम्मान, "मणि" सम्मान  "काव्य- कमल" सम्मान, "रसिक"सम्मान, "ज्ञान- चंद्रिका" सम्मान ,

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


Sponsored
हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia