नारी का अपमान न हो, वो सुहाग बना

Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

रचनाकार- Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'

विधा- गज़ल/गीतिका

पदांत- बना
समांत- आग

जीवन का उत्कर्ष, प्रेम और त्याग बना.
सर्वधर्म समभाव सब से, अनुराग बना.

मोह, माया, मत्सर से, नहिं हो, तू प्रेरित,
जीवन बहु-सुखाय, बहु-हिताय, प्रयाग बना.

तीव्र दावानल, बड़वानल से, जठरानल,
जीवन जले न, कुछ ऐसा ही, सुराग बना.

भ्रष्ट, अपकर्ष, निकृष्ट, प्रदूषित भाव सभी,
जल कर, सोना बनें विशुद्ध, वो आग बना.

देव अर्द्धनारीश्वर, में ही' अब, पुजें सदा,
नारी का, अपमान न हो, वो सुहाग बना.

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Dr. Gopal Krishna Bhatt 'Aakul'
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1970 से साहित्‍य सेवा में संलग्‍न। अब तक 13 संकलन, 6 कृतियाँँ (नाटक, काव्‍य, लघुकथा, गीत संग्रह, नवगीत संग्रह ) प्रकाशित। 1993 से अबतक 6000 से अधिक हिन्‍दी वर्गपहेली 'अमर उजाला' व अन्‍य समाचार पत्रों में प्रकाशित। वर्तमान में ई पत्रिका 'अभिव्‍यक्त्‍िा-हिन्‍दी-ऑर्ग' पर 2010 से हिन्‍दी वर्ग पहेली निरंतर प्रकाशित। जून 2015 में राज.तक.वि.वि. कोटा से सेवानिवृत्‍त. साहित्‍य सेवा में संलग्‍न.

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