नारी अबला

Veerendra Krishna

रचनाकार- Veerendra Krishna

विधा- अन्य

#नारी_अबला

हे..! नारी..
तुम प्रमदा,
तुम रूपसी,
तुम प्रेयसी,
तुम ही भार्या,
तुम ही सौन्दर्या,
तुम सुदर्शना,
तुम अलभ्य अनिर्वचनीया|
फिर भी तुम अबला..!

हे..! नारी…
तुम कान्ता,
तुम रमणी,
तुम वामा,
तुम ललना,
तुम वनिता,
तुम कामिनी,
तुम भामिनी,
तुम सृष्टिकर्ता,
तुम पूर्ण नारीत्व गर्विता,
तुम गृहस्थ की पूर्णता,
तुम से ही सम्पूर्णता|
फिर भी तुम अबला..!

तुम आराध्य,
तुम स्तुति,
तुम इला,
तुम पद्मा,
तुम अम्बिका,
तुम कृष्णा,
तुम शिवा,
तुम दुर्गा,
तुम ही शारदा,
तुम सर्वत्र,
तुम ही कलत्र,
तुम आत्मजा,
तुम सहोदरा,
तुम ही विश्वंभरा|
फिर भी तुम अबला…!

|कब तक…?|
©Veerendra Krishna

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