नाम याद आता है।।

GOVIND SINGH LODHI

रचनाकार- GOVIND SINGH LODHI

विधा- गज़ल/गीतिका

हर बार वही नाम याद आता है।
तन्हाई में मुझे क्यों रुलाता है।।
बिछड़ जाता हूँ जब भी रास्तो से,
तू ही क्यों मुझे रास्ता दिखता है।।
लोधी सब लोग तुझे गुलाब कहते है,
बता तू क्यों मुझे भवरा बनाता है।।
तेरी सखिया तेरे नाम से बुलाती है मुझे,
हर किसी से दिल के राज क्यों बताता है।।

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GOVIND SINGH LODHI
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