नाज़ हुस्न पे न कर

Pritam Rathaur

रचनाकार- Pritam Rathaur

विधा- मुक्तक

नाज़ हुस्न पे न कर एक दिन ये ढल जाये
ये तो ऐसा मौसम है पल में जो बदल जाये

आ छुपा लूँ मैं तुझको अपनी इन निगाहों मैं
मरमरी बदन तेरा धूप में न जल जाये
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2
—–;;;;; ——
अब छुड़ाना न दामन सनम
साथ तेरा —है जीवन सनम

बन गई ——-जिंदगी हो मेरी
तुम ही दिल की हो धड़कन सनम
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3

वतन का मेरे ——नौजवां जा रहा है
तिरंगे में लिपटा ——धुआँ जा रहा है

जरा पूछ लो हाल उस मां का "प्रीतम"
जिसके खुशी का ——समां जा रहा है

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Pritam Rathaur
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मैं रामस्वरूप राठौर "प्रीतम" S/o श्री हरीराम निवासी मो०- तिलकनगर पो०- भिनगा जनपद-श्रावस्ती। गीत कविता ग़ज़ल आदि का लेखक । मुख्य कार्य :- Direction, management & Princpalship of जय गुरूदेव आरती विद्या मन्दिर रेहली । मानव धर्म सर्वोच्च धर्म है मानवता की सेवा सबसे बड़ी सेवा है। सर्वोच्च पूजा जीवों से प्रेम करना ।

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