नही चाहता

Rishav Tomar (Radhe)

रचनाकार- Rishav Tomar (Radhe)

विधा- गज़ल/गीतिका

सब कुछ त्याग कर मैं पत्थर नही बनाना चाहता
इंसान ही ठीक हूँ मैं ईश्वर नही बनाना चाहता

रिस्तों को निभाते निभाते मैं बर्बाद हो गया हूँ
अब रिस्तों के लिये खुद को मिटाना नही चाहता

उनको यादों करके मैं शामो सहर परेशान रहा हूँ
अब जमाने की खातिर उन्हें भुला लूटना नही चाहता

हर किसी शख्स से मैं सदा प्रेम करता रहा हूँ
लेकिन उनकी खातिर मैं उसे भुलाना नही चाहता

अगर उनसे रिस्ता न तोड़ पाना मेरी खुदगर्जी है
तो खुदगर्ज ही ठीक हूँ परोपकारी नही बनाना चाहता

मुझे किसी के दिल मे मोहबत का दीपक बन जलना है
मैं किसी आरती के थाल में नही सजना चाहता

श्राद्ध विश्वास त्याग और समर्पण सब बेकार की बात है
ऋषभ इन चोचलों में पड़ कर उसे खोना नही चाहता

Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Rishav Tomar (Radhe)
Posts 31
Total Views 373
ऋषभ तोमर पी .जी.कॉलेज अम्बाह मुरैना बी.एससी.चतुर्थ सेमेस्टर(गणित)

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia