****नहीं भूलेंगे **नहीं भूलेंगे** ये सुनहरे पल****

Neeru Mohan

रचनाकार- Neeru Mohan

विधा- कविता

***नहीं भूलेंगे ****नहीं भूलेंगे
****यह सुनहरे दिन****

** सुबह जल्दी उठना
वैन के हॉर्न का बजना
स्कूल पहुँचने की मारामारी
और लेट कभी न होना

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नही भूलेंगे

**लेट कभी हो जाएँ
तो लेट एराइवल्स की लाइन में
यूँ लगना
कक्षा में पहुँचकर
यूँ बातों में उलझना
कभी किसी पर
तो कभी अपने आप पर भड़कना

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे

**पीरियड की पहली घंटी पर
यूँ टीचर का आना
टीचर के आते ही
उन्हें अपनी बातों में घुमाना
कभी यह समझ नहीं आया
कभी वह समझ नहीं आया
यूँ ऐसे ही करके
पूरा पीरियड गँवाना

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे

**लंच ब्रेक की घंटी बजने पर
मस्ती पूरी ही करना
अपने लंच से पहले
दूसरे का लंच बॉक्स पकड़ना
अपना खाना न खाकर
दूसरों का खाना झपटना

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे

**गेम्स के पीरियड का हफ्ते में
एक बार ही होना
रोज-रोज खाली पीरियड का
इंतजार यूँ होना
किसी टीचर के छुट्टी लेने पर
हर बार खुश होना
तो किसी के कक्षा में न आने पर
यूँ उदास होना

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे

**अकाउंट के पीरियड में
बैलेंस शीट का न मिलना
इक्नोमिक्स के पीरियड में
अर्थशास्त्र न समझना
बिजनेस स्टडीज़ के पीरियड से
बच के निकलना
मैथ्स के पीरियड के आते ही
सिर का यूँ भारी-सा होना

**नहीं भूलेंगे, भूलेंगे नहीं, नहीं भूलेंगे

**हिस्ट्री के पीरियड में
पुरातन में चले जाना
राजनीति विज्ञान के पीरियड में
भ्रष्टाचार पर वार्तालाप करते जाना
अंग्रेजी के पीरियड में
जमकर धमाल
हिंदी का पीरियड आते ही
वीरगाथा काल और आदिकाल पर संभाष

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे

**यह सारी की सारी यादें सुनहरी
हर बीता सुनहरा पल
हर यादें रंगीली
दोस्तों की, टीचर की
बातें अनोखी
स्कूल की दीवारें और खिड़की
कक्षा का वह कमरा
असेंबली हॉल में
प्रेयर में बातें यूँ करना

**नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे, नहीं भूलेंगे

**प्रधानाचार्य जी के
प्रेरणादाई हर शब्द
उनकी हर शिक्षा
उनके हर लब्ज़
करेंगे मार्गदर्शन जीवन का
मील के पत्थर समान
उनके विद्यालय से पाया
समस्त ज्ञान भंडार |**†***

**नहीं भूलेंगे ,नहीं भूलेंगे ,नहीं भूलेंगे

**फेयरवेल की मस्ती
***यह दोस्तों का साथ
****पल यह सुहाना
*****सुहाना यह आज

**कहाँ कौन जाएगा
***क्या मंजिल वो पाएगा
****नहीं किसी को खबर है यह आज
*****यह मंज़र, यह मौसम
******नहीं फिर से आएगा
*******समय बीत जाएगा
********ये फिर से न आएगा

**नया दिन फिर आएगा
***हमारा प्यारा-सा यह साथ
****यही पर रह जाएगा
*****यही है वह रंगमंच
******ये रंगमंच वही है
******जिसकी डोर थामी ईश्वर ने है

**अगर वह मिलाएगा
***हम फिर से मिलेंगे
****यही मस्ती और धमाल
*****फिर मिलकर करेंगे

**विदा का समय है
***विदा अब है होना
****सफल जीवन में सब हो
*****शुभ हो सब की रैना

**नया दिन रोज़ आएगा
***नया उजाला फैलाएगा
****हर नई किरण के साथ
*****क्षितिज तक पहुँचाएगा |||||

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Neeru Mohan
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व्यवस्थापक- अस्तित्व जन्मतिथि- १-०८-१९७३ शिक्षा - एम ए - हिंदी एम ए - राजनीति शास्त्र बी एड - हिंदी , सामाजिक विज्ञान एम फिल - हिंदी साहित्य कार्य - शिक्षिका , लेखिका friends you can read my all poems on my blog (काव्य धारा) blogspot- myneerumohan.blogspot.com

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