नहीं पता

Brijpal Singh

रचनाकार- Brijpal Singh

विधा- कविता

मुझे मंज़िल का नहीं पता
मुझे रस्ते का नहीं पता

चला जा रहा हूँ बस सुर एक है…
मुझे जंगल का नहीं पता
मुझे मंगल का नहीं पता

अभी तो चलना शुरू किया है मैने…
मुझे सरल का नहीं पता
मुझे विरल का नहीं पता

मैं खुद में इक कीडे सा हूँ इस जहाँ में…
मुझे लहरों का नहीं पता
मुझे कहरों का नहीं पता

चाहत है बस उजाला ही उजाला हो…
मुझे सवेरे का नहीं पता
मुझे अँधेरे का नहीं पता

____________________________बृज

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Brijpal Singh
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मैं Brijpal Singh (Brij), मूलत: पौडी गढवाल उत्तराखंड से वास्ता रखता हूँ !! मैं नहीं जानता क्या कलम और क्या लेखन! अपितु लिखने का शौक है . शेर, कवितायें, व्यंग, ग़ज़ल,लेख,कहानी, एवं सामाजिक मुद्दों पर भी लिखता रहता हूँ तज़ुर्बा हो रहा है कोशिश भी जारी है !!

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