नहीं चैन में कोई, छोड़ दो कक्का बीड़ी /सूरज नाम परंतु, पी रहे बुद्धू-बीड़ी

बृजेश कुमार नायक

रचनाकार- बृजेश कुमार नायक

विधा- कुण्डलिया

बीड़ी औ सिगरेट पी, पत्नी को दें ज्ञान|
कहें नहीं दिखला मुझे, मद की ऊँची तान||
मद की उँची की तान,दिखाती खाकर मेरा|
नाती से कह रही ,नशेड़ी बब्बा तेरा||
कह "नायक" कविराय,पकड़ माया की सीढ़ी|
नहीं चैन में कोई, छोड़ दो कक्का बीड़ी||

बीडी-गुटखा वाँटते, मैैला धूम्र अपार|
काका रोज डकारते, फुप्फुस हैंबीमार||
फुप्फुस हैं बीमार, स्वाद मुँह का कुछ खारा|
जकड़ें रोग अपार ,'स्वच्छ भारत' है नारा||
कह "नायक" कविराय, दुखी है सारी पीढ़ी|
सूरज नाम परंतु, पी रहे बुद्धू-बीड़ी||

बृजेश कुमार नायक
"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" कृतियों के प्रणेता

-गुटखा=कटी सुपारी ,कत्था,तंबाकू एवं चूना का मिश्रण जो पैक किया हुआ बाजार में मिलता है |
(एक नशीला मिश्रण)
-फुुप्फुस= फेफड़ा

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बृजेश कुमार नायक
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एम ए हिंदी, साहित्यरतन, पालीटेक्निक डिप्लोमा जन्मतिथि-08-05-1961 प्रकाशित कृतियाँ-"जागा हिंदुस्तान चाहिए" एवं "क्रौंच सुऋषि आलोक" साक्षात्कार,युद्धरतआमआदमी सहित देश की कई प्रतिष्ठित पत्र- पत्रिकाओ मे रचनाएं प्रकाशित अनेक सम्मानों एवं उपाधियों से अलंकृत आकाशवाणी से काव्यपाठ प्रसारित, जन्म स्थान-कैथेरी,जालौन निवास-सुभाष नगर, कोंच,जालौन,उ.प्र.-285205 मो-9455423376एवं 8787045243 व्हाट्सआप-9956928367

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