==* नशीला है सागर *==

SHASHIKANT SHANDILE

रचनाकार- SHASHIKANT SHANDILE

विधा- गीत

नशीला है सागर ये आंखे जो तेरी
डूब जाऊ मैं उनमें जी चाहता है
लबों की वो प्यारी सी मुस्कान तेरी
तेरे साथ हसने को जी चाहता है

नशीला है सागर ……

है कैसा सितम दूर जाने हो तुम क्यों
भर लू बाहों में तुमको जी चाहता है
सजी शाम है देखो मैफिल भरी ये
तेरे साथ गाने को जी चाहता है

नशीला है सागर …….

ये जुल्फे तेरी हो जैसे बहती हवा
तेरे साथ उड़ने को जी चाहता है
नही हो रहा अब सबर मेरे दिल से
बात दिलकी सुनाने जी चाहता है

नशीला है सागर ………

बहोत है हसीं इस जमाने मे लेकिन
साथ पाने को तेरा ही जी चाहता है
ये दौलत ये शौहरत भले दे न पाऊ
मगर साथ जीने को जी चाहता है

नशीला है सागर ये आंखे जो तेरी
डूब जाने को उनमें जी चाहता है
—————//**–
शशिकांत शांडिले, नागपुर
भ्र.९९७५९९५४५०

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It's just my words, that's it.

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