नशा शराब या तुम्हारी आँखों में

भूरचन्द जयपाल

रचनाकार- भूरचन्द जयपाल

विधा- कविता

नशा शराब या तुम्हारी आंखों में
**************
नशा केवल शराब में ही नहीं है
तुम्हारी आँखों में भी है
शराब पीने के लिए तो
महखाने जाने पड़ता है
तुम पिलाती हो तो पूरा
घर महखाना बन जाता है
तुम्हारी आंखे पैमाना
शराब पीकर तो शराबी
गलियों में गिरता पड़ता है
अपनी और अपनों की
आबरू खोता है और न ही
किसी का सहारा मिलता है
जो थामले
तुम्हारी मदभरी आंखों में
वो नशा है जो गिरते हुए
को भी अपनी बाँहों में थाम लें
आंखों ही आंखों में वो
पीकर मदहोश हो जाता है
बिना एनेस्थीसिया के ही
जो बेहोश हो जाता है
सुबह उठते ही बीमार से
पूर्णतः स्वस्थ हो जाता है
अब तूं ही बता नशा
शराब में ज्यादा है
या तुम्हारी आंखों में
नफ़ा तुम्हारी आंखों में
ज्यादा है या फिर
शराब की राहों में
जो आदमी की इज्जत को
घुमा दे चौराहों में
फिर आदमी फिरता है
क्यों दोराहों में
अब बता नशा
शराब में ज्यादा है
या तुम्हारी आंखों में ।।
👍मधुप बैरागी

Views 90
इस पेज का लिंक-
Sponsored
Recommended
Author
भूरचन्द जयपाल
Posts 312
Total Views 5.1k
मैं भूरचन्द जयपाल वर्तमान पद - प्रधानाचार्य राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कानासर जिला -बीकानेर (राजस्थान) अपने उपनाम - मधुप बैरागी के नाम से विभिन्न विधाओं में स्वरुचि अनुसार लेखन करता हूं, जैसे - गीत,कविता ,ग़ज़ल,मुक्तक ,भजन,आलेख,स्वच्छन्द या छंदमुक्त रचना आदि में विशेष रूचि, हिंदी, राजस्थानी एवं उर्दू मिश्रित हिन्दी तथा अन्य भाषा के शब्द संयोग से सृजित हिन्दी रचनाये 9928752150

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia