‘नव कुंडलिया ‘राज’ छंद’ में रमेशराज के 4 प्रणय गीत

कवि रमेशराज

रचनाकार- कवि रमेशराज

विधा- कविता

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत-1
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जब वो बोले मिसरी घोले
मिसरी घोले हौले-हौले
हौले-हौले प्रिय मुसकाये
प्रिय मुसकाये मन को भाये
मन को भाये, मादक चितवन
मादक चितवन, अति चंचल मन
अति चंचल मन प्यार टटोले
प्यार टटोले जब वो बोले |
+रमेशराज

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत -2
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वे मुसकाते तम में आये
तम में आये, भाव जगाये
भाव जगाये मिलन-प्रीति का
मिलन-प्रीति का, रति-सुनीति का
रति-सुनीति का, दीप जलाये
दीप जलाये हम मुसकाये |
+रमेशराज

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत -3
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" पल-पल उसकी चंचल आँखें
चंचल आँखें, बादल आँखें
आँखें हरिणी जैसी सुंदर
सुंदर-सुंदर संकेतों पर
संकेतों पर मन हो चंचल
मन हो चंचल, यारो पल-पल | "
(रमेशराज )

'नव कुंडलिया 'राज' छंद' में प्रणय गीत-4
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" पल-पल उससे मिलने को मन
मिलने को मन, पागल-सा बन
पागल-सा बन, उसे पुकारे
उसे पुकारे, प्रियतम आ रे !
प्रियतम आ रे, तब आये कल
तब आये कल, जब हों रति-पल | "
(रमेशराज )
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रमेशराज, 15/109, ईसानगर, अलीगढ-२०२००१
मो.-९६३४५५१६३०

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कवि रमेशराज
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परिचय : कवि रमेशराज —————————————————— पूरा नाम-रमेशचन्द्र गुप्त, पिता- लोककवि रामचरन गुप्त, जन्म-15 मार्च 1954, गांव-एसी, जनपद-अलीगढ़,शिक्षा-एम.ए. हिन्दी, एम.ए. भूगोल सम्पादन-तेवरीपक्ष [त्रैमा. ]सम्पादित कृतियां1.अभी जुबां कटी नहीं [ तेवरी-संग्रह ] 2. कबीर जि़न्दा है [ तेवरी-संग्रह]3. इतिहास घायल है [ तेवरी-संग्रह एवम् 20 स्वरचित कृतियाँ | सम्पर्क-9634551630

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