नववधु

सोनू हंस

रचनाकार- सोनू हंस

विधा- हाइकु

#हाइकु#

पल में रोए
उजाड़ सी होकर
वो नववधु

महकती थी
बाबुल के आँगन
विदा हो रही

माँ की लाड़ली
आँगन की चिड़िया
है उड़ चली

बापू की परी
चुनरिया को ओढे़
पीहर छोडे़

जग की रीत
सजन घर जाना
निभा री सखी
सोनू हंस##

Sponsored
Views 9
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
सोनू हंस
Posts 48
Total Views 584

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia