नवरात्रि पर्व

Manju Bansal

रचनाकार- Manju Bansal

विधा- लेख

हमारे देश भारतवर्ष में अनेकों त्यौहार समय समय पर रंगीली छटा बिखेरते रहते हैं । हिंदू धर्म के प्रमुख त्यौहारों में नवरात्रि पर्व भी अपना विशेष महत्व रखता है। बाक़ी सभी त्यौहार वर्ष में एक बार ही मनाये जाते हैं पर नवरात्रों का पर्व साल में दो बार आस्था, निष्ठा व श्रद्धा के साथ पूरे देश में मनाया जाता है …… जिसमें शक्ति की प्रदाता दुर्गा माता की विशेष रूप से आराधना की जाती है । सभी प्रांतों के लोग अपने रीति- रिवाज व आस्था से इस पर्व को मनाते हैं ।दुर्गा माता के अनेकों नाम प्रचलित हैं– कुषमांडा, ब्रह्मचारिणी . कात्यायनी, स्कंदमाता, चंद्रघंटा,कालरात्रि, महागौरी, ज्वाला, वैष्णवी, काली आदि… और भी अनेकों नाम ।
चैत्र मास के शुक्ल पक्ष की प्रथम से नवमी तक नवराते मनाये जाते हैं जिसमें प्रथम दिन घट स्थापना कर देवी की स्तुति के साथ आराधना प्रारंभ की जाती है ….. घर- घर पूजा- पाठ , मंगलाचार , उपवास , भजन आदि होते हैं । मंदिरों में दर्शनार्थयों की लंबी क़तारें लगी रहती हैं ।नवमी के दिन हवन कर कन्या पूजन करके देवी को भोग लगाकर कन्याओं को भोजन करा कर दक्षिणा दे माता की विदाई की जाती है। इसी दिन भगवान श्रीराम की जन्म तिथि भी धूमधाम से मनाई जाती है ।
आश्विन माह के शुक्ल पक्ष हमें शारदीय नवराते बड़ी धूमधाम से मनाये जाते हैं । इस समय प्रकृति की निराली छटा लोगों के मन में अपार उत्साह का संचार करती है…ऊपर से त्यौहारों का मौसम….. दिलों में नवस्फू्र्ति व उमंग भर देते हैं । इस समय देवी की उपासना व प्रतिष्ठा देश भर में जोश व उल्लास से की जाती है ।
कहा जाता है…… दैत्यों के उत्पात से स्वर्ग से निष्कासित व अपमानित होने पर देवताओं के कल्याण के लिये भगवान ब्रह्मा, विष्णु व शिवजी केतेज पुंज से शक्तिदात्री दुर्गा जी का आविर्भाव हुआ…. जिन्होंने अनेक रूपों में एक साथ उपस्थित होकर समय समय पर महिषासुर, चंड- मुंड, शुंभ- निशुंभ आदि हज़ारों दैत्यों का अपनी अनुपम शक्ति से संहार कर देवताओं को पुन: स्वर्गलोक पर आसीन किया ।
तभी से देवी के शक्ति स्वरूप की आराधना की जाती है ।
श्रीराम जी ने भी शारदीय नवरातों में प्रथम दिन समुद्र तट पर देवी का आह्वान किया था एवं विजयादशमी के दिन रावण का संहार कर लंका पर विजय प्राप्त की थी ।तभी से प्रतिवर्ष दशहरे के दिन पूरे देश में रावण दहन किया जाता है…. जिसका मूल आशय अधर्म पर धर्म की , अत्याचार पर सदाचार की जय है ।
बंगाल में ारदीय नवरात्रि पर्व विशिष्ट रूप से मनाया दाता है । मंदिरों व सार्वजनिक स्थलों पर सुंदर पंडालों से सजावट की जाती है…..साथ ही मनोरम झाँकियाँ व विद्युत की निराली छटा बरबस अपनी ओर आकर्षित करते हैं.। देवी के विभिन्न स्वरूप , मनमोहक प्रतिमायें मानो जीवंत हो उठती हैं ।
बंगाल के साथ साथ देश के अन्य भागों में भी दुर्गा पूजा मनायी जाती है ।गुजरात में नवरातों में नौ दिन तक देवी की पूजा – अर्चना के साथ गरबा व डांडिया का भी प्रचलन है जो अब पूरे देश में उल्लास व उमंग के साथ मनाया जाता है ।
दशमी के दिन देवी की वंदना कर विसर्जन कर दिया जाता है । इन मै दिनों तक सर्वत्र उत्साह परिलक्षित होता है ।
बड़े दु: ख की बात है कि हमारे देश में नारी की देवी के रूप में बजा की जाती है वहीं दूसरी ओर नारी पर अनेकों अत्याचार व प्रताड़नायें भी दी जाती हैं …… सचमुच दयनीय व विचारणीय स्थिति है । मै इस बार दुर्गा जी से प्रार्थना करती हूँ कि मानव को सद्बुद्धि व विवेक प्रदान करे जिससे नारी पुन: समाज में पूज्या समझी जाये ।।

** मंजु बंसल **
जोरहाट

( मौलिक व प्रकाशनार्थ )

Sponsored
Views 4
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
Manju Bansal
Posts 7
Total Views 127

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia