नमन है भारत के वीरों को शेरो की सन्‍तानो को

bharat gehlot

रचनाकार- bharat gehlot

विधा- कविता

नमन है भारत के वीरों काे शेरो की सन्‍तानों को ,
जिन वीरो के नाम से ही दुश्‍मन यु थर्राता है ,
रहते है बडी मुश्‍किलो में सीमा पर तैनात यह ,
देश में जब हो दिवाली वो लहु की होली खेलते है ,
न दिन को उनको चैन है न रातों को आराम है ,
सो सके चैन की नींद देश्‍ावासी हर समय यह चौकस रहते है ,
वो रहते है मिलजुल ऐसे जैसे हो एक मॉ की सन्‍ताने ,
भेदभाव मिटाकर कहते हिन्‍दु , मुस्‍िलम ,सिख्‍ा ईसाई सब एक ईश्‍वर की संतान है ,
वो हमको यह समझाने मिलजुल सभी रहे हरदम यह रहबर का पैगाम है ,
रहबर का पैगाम यह कहता न लडो यहा पर भुख्‍ण्‍ड की खातिर ,
किसी की धरती है न किसी का यहा आसमान है ,
दुविधाओ से न घबराए उन सैनिको को सलाम है ,
इन साहसी सैनिको की बदौलत हिन्‍दुस्‍तान की अान बान और शान है ,
कहता यह हाथ जोडकर गहलोत ,
भले बनाओ बच्‍चो को डाॅक्‍टर, इंजीिनयर लेकिन बस यह ध्‍यान रहे,
कभी भी भुल से भी यह न भूले सैनिक हिन्‍दुस्‍तान की अान बान और शान है ,
भरत गहलोत
जालाेर राजस्‍थान
सम्‍पर्क 7742016184

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