नजर..।।

विनोद सिन्हा

रचनाकार- विनोद सिन्हा "सुदामा"

विधा- कविता

👁👁..नजर..👁👁

नजर ने नजर को जब नजर से बुलाया.।
नजर ने नजर को तब नजर दिखाया.।
👁 👁
नजर ने नजर से जब नजर मिलाया.।
नजर ने नजर से तब नजर चुराया.।
👁 👁
नजर ने नजर का जब नजर घुममाया.।
नजर से नजर का तब नजर शर्माया.।
👁 👁
नजर ने नजर को जब नजर से बताया.।
नजर का नजर पर नजर है आया.।
👁 👁
नजर ने नजर को नजर से समझाया.।
नजर के नजर ने है तेज नजर पाया.।
👁 👁
विनोद सिन्हा-सुदामा

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विनोद सिन्हा
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मैं गया (बिहार) का निवासी हूँ । रसायन शास्त्र से मैने स्नातक किया है.। बहुरंगी जिन्दगी के कुछ रंगों को समेटकर टूटे-फूटे शब्दों में सहेजता हूँ वही लिखता हूँ। मै कविता/ग़ज़ल/शेर/आदि विधाओं में लिखता हूँ ।

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