नकल उन्मूलन

Radhey shyam Pritam

रचनाकार- Radhey shyam Pritam

विधा- गीत

नकल से मंजिल आसान नहीं होती।
बिन पंख के जैसे उडान नहीं होती।
ज्ञान से सफलता के खुलते हैं रास्ते,
बिन ज्ञान इंसान की पहचान नहीं होती।

सालभर किताबें खोलता नहीं है जो।
नई तरकीबें नकल की सोचता है वो।
अरे!कहदो उससे तुम-
ऐसे परीक्षाएँ पास नादान नहीं होती।
बिन पंख के……………।

धोखे-दौलत की डिग्री काम नहीं आती।
सुबह चाहे आए इसकी शाम नहीं आती।
अरे!कहदो उससे तुम-
कागजी-फूलों में कभी जान नहीं होती।
बिन पंख के……………..।

करो मेहनत तुम जिंदगी सँवर जाएगी।
वरना हार की हवा में ये बिखर जाएगी।
अरे!सुनलो कान खोल तुम-
चोरदिल होठों पर मुस्कान नहीं होती।

राधेश्याम "प्रीतम"
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