नए नए नित छंद

RAMESH SHARMA

रचनाकार- RAMESH SHARMA

विधा- दोहे

कलम स्वरूपी पुष्प से ,निकलेगा मकरंद !
यही सोच रचवा रही,..नए नए नित छंद!!

करें लेखनी से नही,औरौं का अपमान !
होते है साहित्य के,पंडित वही महान !!
रमेश शर्मा.

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RAMESH SHARMA
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अपने जीवन काल में, करो काम ये नेक ! जन्मदिवस पर स्वयं के,वृक्ष लगाओ एक !! रमेश शर्मा
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