# धूप छांव #

संजय सिंह

रचनाकार- संजय सिंह "सलिल"

विधा- गज़ल/गीतिका

छांव तो है एक छलावा, धूप मन का है भरम l
रात या दिन कर रहे, दोनों के है अपने करम ll

धूप में टपके पसीना, जो कभी तेरे बदन l
छांव तकती राह है, तू चल रहा अपने धरम ll

धूप हो या छांव का पल काम चलना ही तेरा l
जिंदगी के काम आने, में ना हो कोई शरम ll

जो कभी रस्ते सुकोमल, या के कांटों से भरे l
करना पूरा ही सफ़र है, हो नरम या के गरम ll

कुछ भी शाश्वत है नहीं, पल पल बदलता है जहां l
जो अडिग हो फैसला तो, धूप पड़ती है नरम ll

संजय सिंह "सलिल"
प्रतापगढ़ ,उत्तर प्रदेश l

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संजय सिंह
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मैं ,स्थान प्रतापगढ़ उत्तर प्रदेश मे, सिविल इंजीनियर हूं, लिखना मेरा शौक है l गजल,दोहा,सोरठा, कुंडलिया, कविता, मुक्तक इत्यादि विधा मे रचनाएं लिख रहा हूं l सितंबर 2016 से सोशल मीडिया पर हूं I मंच पर काव्य पाठ तथा मंच संचालन का शौक है l email-- sanjay6966@gmail.com, whatsapp +917800366532

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