धीरे-धीरे धरती बन रहा है आग का गोला

लक्ष्मी सिंह

रचनाकार- लक्ष्मी सिंह

विधा- कविता

🌎🌏🌍विश्व पृथ्वी दिवस🌎🌏🌍
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धीरे-धीरे धरती बन रहा है आग का गोला।
ये विश्व समुदाय के लिए बड़ा गम्भीर मुद्दा।
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वायुमंडल में बढ़ती कार्बनडाईआॅक्सािड की मात्रा।
तरह-तरह के बीमारियों से जनजीवन को खतरा।
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दशकों से प्रभावित हो रही धरती की आबोहवा।
दिनोंदिन बिगड़ती स्थिति भयानक जानलेवा।
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कुछ प्राकृतिक प्रक्रिया तो कुछ मानव जनित कारण।
दिन ब दिन ग्रीनहाउस गैस से ओजोन परत में क्षरण।
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ग्लोबल वार्मिंग का सबसे बड़ा कारण है प्रदूषण।
पेड़ों की नितकटाई,शहरीकरण,आधुनिकीकरण।
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हर खाली जगह पर बन रहे बिल्डिंग कारखाना।
अपनी सुविधा के लिए नदियों की दिशा बदल देना।
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वाहनों के उपयोग से नित अंधाधुंध गैसीय उत्सर्जन,
अत्याधिक बिगाड़ रहा धरती पर प्राकृतिक संतुलन।
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मानव ने स्वार्थवश पेड़ों को काट डाला।
खुली ताजी हवा के लिए कोई स्त्रोत नहीं छोड़ा।
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ग्लोबल वार्मिंग का जिम्मेदार खुद मनुष्य।
इसे माफ नहीं करेगा आने वाले भविष्य।
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कितनी दुख भरी, कितनी शर्म की है ये बात।
धरती का गला घोट रहा खुद मानव अपने हाथ।
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एक तरफ मानव ने सुख सुविधा का साधन जुटाया।
दूसरी ओर प्राकृतिक पर्यावरण को नुकसान पहुंचाया।
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वो दिन दूर नहीं जब हो जाएगा पूरी धरती का विनाश।
खुद अपने हाथों मानव कर रहा अपना सत्यानाश।
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धरती का सबसे अधिक बुद्धिमान प्राणी।
जानबूझकर कर रहा ये कैसी नादानी।
🌍🌏🌎🌍—लक्ष्मी सिंह 💓😊

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लक्ष्मी सिंह
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