दो मुक्तक—–

Vivek Chauhan

रचनाकार- Vivek Chauhan

विधा- मुक्तक

जुल्फ में तेरी उलझते जा रहा हूँ रात – दिन
नाम तेरा लिख के गीत गा रहा हूँ रात- दिन
देख कर एक नजर में ना जाने तूने क्या किया
आँशुओ का मरहम दिल पे लगा रहा हूँ रात -दिन
©विवेक चौहान एक कवि

मुफलिसी कब ये दूर जायेगी पापा
ज़िन्दगी कब खुल के हंसायेगी पापा
भीगा बहुत हूँ मैं अंबर की बारिश में
ये जमी कब पानी बरसायेगी पापा

स्वंयरचित रचना सर्वाधिकार प्राप्त
©विवेक चौहान एक कवि
बाजपुर , ऊधम सिंह नगर
(उत्तराखण्ड)7500042420

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Vivek Chauhan
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बाजपुर उत्तराखंड का निवासी हूँ काव्य जगत का नवीन तारा हूँ समस्त विधायें लिखता हूँ किन्तु भाव अनुरूप जब जैसे आ जाये l छोटी सी उम्र में छोटी सी कलम लेकर काव्य पथ पर चल रहा हूँ

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