दो आफ़ताब (शायरी)

डॉ सुलक्षणा अहलावत

रचनाकार- डॉ सुलक्षणा अहलावत

विधा- शेर

आज दो गुलाब एक साथ देखे,
इतने हसीं ख्वाब एक साथ देखे।
दिल की धड़कन ही रुक गयी थी,
जब दो आफ़ताब एक साथ देखे।।

©® डॉ सुलक्षणा अहलावत

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डॉ सुलक्षणा अहलावत
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लिख सकूँ कुछ ऐसा जो दिल को छू जाये, मेरे हर शब्द से मोहब्बत की खुशबु आये। शिक्षा विभाग हरियाणा सरकार में अंग्रेजी प्रवक्ता के पद पर कार्यरत हूँ। हरियाणवी लोक गायक श्री रणबीर सिंह बड़वासनी मेरे गुरु हैं। माँ सरस्वती की दयादृष्टि से लेखन में गहन रूचि है।

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