दोहे…नीति पर

कौशल कुमार पाण्डेय

रचनाकार- कौशल कुमार पाण्डेय "आस"

विधा- दोहे

प्रीत रीत सबसे सुघर,तोडो़ मत विश्वास।

बिना प्रेम मानव रहे,जीवन जन्म निराश।।

नीतिपरक दोहे कहूं,सुन लो धर कर ध्यान।

प्रेम सहित विष पानकर,मीरा बनी महान।।

रावण ज्ञानी था बडा़ ,बतलाते सब लोग।
अहंकार तज नहिं सका,बहुत बडा़ ये रोग।।

त्याग कर्म को सीख लो,रखो प्रभु पर आस।
ऐ नर जीवन में कभी,होगा नहीं निराश।।

सखा नीति की बात सुन,भूखे को दो दान।
हेय दृष्टि का त्याग कर,समझ सदा भगवान।।

तृष्णा धन की है बुरी,करना नहीं अधर्म।
अंत समय पछतायगा,करता रहा कुकर्म।।

Sponsored
Views 14
इस पेज का लिंक-
Recommended
Author
कौशल कुमार पाण्डेय
Posts 4
Total Views 44
कौशल कुमार पाण्डेय"आस" बीसलपुर(पीलीभीत)[उ०प्र०] शिक्षा - एम.काम. साझा प्रकाशन -एक पृष्ठ मेरा भी,स्वतंत्र्योत्रर कवि,दोहा संकलन.

इस पर अपनी प्रतिक्रिया देंं


हिंदी साहित्यपीडिया का फेसबुक ग्रुप ज्वाइन करें और जुड़ें दुनिया भर के साहित्यकारों एवं पाठकों से- facebook.com/groups/hindi.sahityapedia